शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: FIR अब तक क्यों नहीं? वरिष्ठ पत्रकार ने उठाए गंभीर सवाल
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: FIR अब तक क्यों नहीं? वरिष्ठ पत्रकार ने उठाए गंभीर सवाल

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और पैसों में गड़बड़ी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। SIT जांच रिपोर्ट आने के बावजूद FIR दर्ज न होने और आरोपियों पर कार्रवाई पर वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ल ने कई तीखे सवाल उठाए हैं।

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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और वहां आने वाले चढ़ावे को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसमें चंदे और पैसों के प्रबंधन में गड़बड़ी और चोरियों की बात स्वीकार की गई है। इसके बावजूद अब तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज न होने पर राजनीतिक गलियारों और मीडिया में तीखी बहस छिड़ गई है।

द जनपद न्यूज़ के खास कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ल ने आदर्श झा के साथ बातचीत में इस पूरे घोटाले और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है और इस पूरे प्रकरण में कई बड़े नाम और ट्रस्ट के लोग सवालों के घेरे में हैं।

चढ़ावा या 'चढ़ावा' नहीं, उत्तरी भारत की धार्मिक परंपरा का हिस्सा

सुनील शुक्ल ने स्पष्ट किया कि इसे सामान्य अर्थों में 'चंदा' कहना उचित नहीं है, बल्कि यह उत्तरी भारत की वह परंपरा है जहां लोग अपने इष्ट देव और आराध्य के प्रति अपनी श्रद्धा और आर्थिक समर्पण अर्पित करते हैं।

  • यह भक्तों द्वारा देवता के प्रति किया गया एक प्रकार का आर्थिक समर्पण है।
  • चढ़ावे में न केवल नकद धनराशि बल्कि सोने-चांदी के आभूषण और ईंटें भी दान की जाती हैं।
  • ट्रस्ट और प्रबंधन द्वारा इस पूरे चढ़ावे की गिनती और रख-रखाव के लिए व्यवस्था बनाई गई थी।

एसआईटी जांच के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं?

एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में यह मान लिया है कि चढ़ावे के पैसों और आभूषणों में गड़बड़ी हुई है, अनिमितताएं बरती गईं और चोरियां भी हुईं। लेकिन सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी अब तक पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई?

  • आपराधिक मामलों में जांच का अधिकार पुलिस या जांच एजेंसियों के पास होता है, न कि प्रशासनिक समितियों के पास।
  • ट्रस्ट के भीतर के प्रमुख लोगों और प्रबंधन से जुड़े करीबी व्यक्तियों पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं।
  • प्रारंभिक रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होने के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई में देरी से कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।

2027 के चुनावों से पहले राजनीतिक नफा-नुकसान

यह पूरा मामला अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी दल इसे लेकर लगातार भाजपा सरकार और मंदिर ट्रस्ट को घेर रहे हैं।

  • समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दल इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
  • 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।
  • जो मतदाता पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं, उनके मन में इस घटना से गहरी निराशा और नाराजगी पैदा हो सकती है।

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल

राम मंदिर निर्माण और संचालन से जुड़े ट्रस्ट की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार के अनुसार, यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद लंबे समय तक तूल पकड़ता रहेगा।

  • मंदिर के रखरखाव और दान राशि की गिनती में शामिल लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
  • ट्रस्ट के भीतर से ही कई बड़े पदाधिकारियों और प्रबंधकों के नाम इस विवाद में सामने आ रहे हैं।
  • भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले इस घोटाले पर निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
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