शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से आहत हैं मूर्तिकार अरुण योगीराज, कहा- हर राम भक्त की आस्था को पहुंची गहरी ठेस
अपराध

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से आहत हैं मूर्तिकार अरुण योगीराज, कहा- हर राम भक्त की आस्था को पहुंची गहरी ठेस

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया है।

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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि ट्रस्ट के महासंचालक चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा नैतिक आधार पर इस्तीफा दे चुके हैं।

अब इस विवाद पर रामलला की दिव्य प्रतिमा को आकार देने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस पूरी घटना को हर राम भक्त की आस्था पर गहरी चोट बताया है और दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की है।

मूर्तिकार अरुण योगीराज का छलका दर्द

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि भगवान श्रीराम के भक्त होने के नाते यह घटना उन्हें गहराई से आहत करती है। दुनिया भर के श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई भगवान की सेवा समझकर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में दान की थी, ऐसे में चोरी की यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है।

  • दुनिया भर के भक्तों की आस्था को लगा करारा झटका
  • श्रद्धालुओं की मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़
  • दान चोरी की घटना से हर राम भक्त स्तब्ध

ट्रस्ट के कामकाज और पारदर्शिता पर सवाल

अरुण योगीराज ने कहा कि जैसे-जैसे राम मंदिर का दायरा और कामकाज बढ़ता गया, वैसे-वैसे व्यवस्था में कमियां भी सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इन्हीं कमियों का गलत फायदा उठाकर भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।

हालांकि, उन्होंने चंपत राय का बचाव करते हुए उन्हें सादगी और पारदर्शिता की मिसाल बताया है, लेकिन साथ ही यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी और इस्तीफे से यह विवाद थमेगा या मंदिर प्रबंधन में और व्यापक सुधार की जरूरत है।

दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा

अरुण योगीराज ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह के अपराध को अंजाम देने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। दान चोरी के मामलों में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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