अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और इसके बाद के घटनाक्रम को लेकर कारसेवक संतोष दुबे ने कई तीखे और गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने देश के मुख्य नेताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कई चौंकाने वाली बातें कही हैं।
एक विशेष पॉडकास्ट के दौरान संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर और आंदोलन से जुड़े मामलों में कई अहम चेहरों और कारसेवकों को नजरअंदाज किया गया, जबकि उन लोगों को बुलाया गया जिनका आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष नाता नहीं था।
राम मंदिर और चढ़ावे की स्थिति पर सवाल
संतोष दुबे ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि देश के मुखिया और कई बड़े नेता हर मामले में आगे रहते हैं, लेकिन जब भगवान राम के आभूषण और खजाने की चोरी जैसे गंभीर विषय सामने आए, तो संबंधित कार्यालय और व्यवस्थाएं मौन नजर आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कई वरिष्ठ नेताओं और कारसेवकों को अपेक्षित सम्मान या बुलावा नहीं मिला।
स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान और अनदेखी
चर्चा के दौरान स्थानीय स्तर पर हुई तोड़फोड़ और विकास के नाम पर घरों को तोड़े जाने का मुद्दा भी उठाया गया:
- लटा मंगेशकर चौराहा और उसके आसपास के इलाके में विकास कार्यों का जिक्र किया गया।
- कहा गया कि राम अचल गुप्ता जैसे कई नौजवानों और स्थानीय लोगों के घर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रभावित या तोड़े गए, लेकिन उनके योगदान को उचित महत्व नहीं मिला।
- आंदोलन में जान गंवाने वाले या संघर्ष करने वाले कई प्रमुख नामों और कारसेवकों की अनदेखी का आरोप लगाया गया।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल पर सवाल
संतोष दुबे ने अयोध्या में राम जन्मभूमि की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तीन लेयर की सुरक्षा में सीआरपीएफ, पीएसी और उत्तर प्रदेश पुलिस तैनात होने के बावजूद बाहरी लोगों और व्यवस्थाओं को लेकर कई तरह के प्रश्न उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम और आंदोलन को सही दिशा देने वाले प्रमुख नेताओं के योगदान को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।


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