राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में अरबों-खरबों के घोटाले का बड़ा आरोप लग चुका है। बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मौलाना शहाबुद्दीन का सीएम योगी को पत्र
मौलाना शहाबुद्दीन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि देश भर में वक्फ की जमीनों और संपत्तियों में अरबों-खरबों रुपये की गड़बड़ी हुई है। उनके अनुसार:
- वक्फ की जमीनें गरीब मुसलमानों, महिलाओं, बच्चों, जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की मदद के लिए दी गई थीं।
- इन जमीनों से होने वाली आमदनी इन्हीं लोगों पर खर्च होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
- सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने वक्फ की जमीनों को बेचा है।
- अगर सही तरीके से जांच हुई तो यह राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले से भी बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
शिया और सुन्नी धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
मौलाना के इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छिड़ चुकी है। शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने भी इस बात का समर्थन किया है:
- उन्होंने कहा कि हमारी मुसलसल यह मांग रही है कि वक्फ बोर्डों की जांच होनी चाहिए।
- वक्फ बोर्ड में जो मामलात हैं, वे किसी भी तरीके से परफेक्ट नहीं हैं और सालों से इनमें गड़बड़ियां हो रही हैं।
- वक्फ की जमीनों पर नाजायज कब्जे किए जा रहे हैं और कुछ जमीनें सरकार के भी कब्जे में हैं।
- ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूद अब्बास ने भी कहा कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से वक्फ संपत्तियों के बिकने और लूटने की शिकायतें मिल रही हैं।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक दलों के नेताओं की भी प्रतिक्रिया सामने आई है:
- उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस के शासनकाल में ये घोटाले सबसे ज्यादा बढ़े।
- उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने करोड़ों की संपत्ति हजारों में बेचकर खुद ले ली और आज भी इनकी कायदे से जांच होनी चाहिए।
- बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी कहा कि वक्फ संपत्तियों में गड़बड़ियों की शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं, जिसके बाद सरकार ने वक्फ कानून में बदलाव किए हैं।


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