राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कारसेवक संतोष दुबे ने 'द जनपथ न्यूज़' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राम जन्मभूमि और अन्य धार्मिक स्थलों पर हुई कथित चोरियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस देश का मुखिया हर मामले में श्रेय लेता रहा है, वह आज राम मंदिर में हुए भ्रष्टाचार और चंदा चोरी पर पूरी तरह मौन है, जो करोड़ों हिंदुओं के लिए बेहद दुखद और निराशाजनक है।
संतोष दुबे ने इस बातचीत में न केवल राम मंदिर के नाम पर हुए कथित घोटालों का जिक्र किया, बल्कि इससे जुड़े कई बड़े नेताओं और संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में संघर्ष करने वाले असली कारसेवकों और संतों की उपेक्षा की जा रही है, जबकि चंदा चोरी के मामलों में शामिल लोगों को संरक्षण मिल रहा है।
राम मंदिर चंदा चोरी पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल
संतोष दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो प्रधानमंत्री हर छोटे-बड़े काम का श्रेय लेते हैं, वे राम जन्मभूमि जैसे पवित्र स्थान पर हुए इतने बड़े घोटाले पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि:
- प्रधानमंत्री और उनका कार्यालय इस मामले में पूरी तरह मौन है, जो देश के 150 करोड़ लोगों के साथ अन्याय है।
- जिन लोगों ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला आने के बाद चंदा इकट्ठा किया और कथित तौर पर चोरी की, उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चाहकर भी इन मामलों में कड़े कदम नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि वे कथित तौर पर प्रशासनिक और राजनीतिक बंधनों में जकड़े हुए हैं।
कारसेवकों की उपेक्षा और संघर्ष का इतिहास
संतोष दुबे ने अपने व्यक्तिगत संघर्ष को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 16 वर्ष की आयु से राम मंदिर के लिए संघर्ष किया है और इस दौरान उन पर कई बार हमले हुए और गोलियां चलीं। उन्होंने कहा कि:
- 6 दिसंबर 1990 और 6 दिसंबर 1992 के आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जिसके दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं और कई हड्डियां टूटीं।
- आंदोलन में सच कहने और न्याय की मांग करने वाले सच्चे कारसेवकों और संतों को आज साइडलाइन कर दिया गया है।
- लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल और परमहंस रामचंद्र दास जैसे दिग्गजों के नाम पर आज कोई चौराहा तक नहीं है, जबकि चंदा खाने वाले लोग मलाई काट रहे हैं।
अन्य धार्मिक स्थलों पर भी चोरियों का आरोप
साक्षात्कार के दौरान संतोष दुबे ने केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी इस तरह की घटनाओं के होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि:
- महाकाल (उज्जैन), केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ धाम और मां वैष्णो देवी के स्थानों पर भी इस तरह की अनियमितताएं और चोरियां सामने आ रही हैं।
- मथुरा और अन्य पवित्र स्थलों पर भी संपत्तियों और चढ़ावे के नाम पर बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।
- देशभर में धार्मिक आयोजनों और ट्रस्टों के नाम पर आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
- इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
- दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए, ताकि देश के करोड़ों राम भक्तों का विश्वास बना रहे।
- यदि सरकार ने इस पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाया, तो देश की जनता का आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है।
एसआईटी जांच और न्याय की मांग
चंदा चोरी के मामलों की जांच को लेकर दुबे ने कहा कि वर्तमान में जो एसआईटी जांच चल रही है, वह केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गई है। उन्होंने मांग की कि:


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