राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े चंदे के उपयोग को लेकर लगातार कई तरह के कयास और आरोप लगाए जाते रहे हैं। इस बीच, 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवा के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए संतोष दुबे ने एक विशेष बातचीत में राम मंदिर आंदोलन और चंदा चोरी के दावों पर खुलकर बात की है।
संतोष दुबे ने खुद पर बीते संघर्षों को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने राम मंदिर के लिए अपना शरीर दांव पर लगा दिया था और अब चंदा चोरी जैसे आरोपों पर उनका क्या रुख है।
1992 की कारसेवा और शरीर पर लगे घाव
संतोष दुबे ने 6 दिसंबर 1992 की उस ऐतिहासिक घटना को याद किया जब ढांचा गिराते समय वे रस्से से खींचे जाने के दौरान गुंबद से नीचे गिर गए थे। उन्होंने बताया:
- उस घटना में उनके शरीर की 17 हड्डियां टूट गई थीं।
- उनके शरीर पर 4 गोलियां भी लगी थीं।
- ढांचा गिरने के बाद उनके ऊपर गुंबद का एक बड़ा टुकड़ा आ गिरा था, जिसके कारण उस वर्ष लोगों ने राखी का त्योहार तक नहीं मनाया था।
चंदा चोरी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया
चंदा चोरी के दावों और इस पर हो रहे बयानों पर संतोष दुबे ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर का निर्माण केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संघ जैसे तीन बड़े पावर सेंटर्स के बीच हुआ था और इतनी बड़ी व्यवस्था में इस तरह के आरोप लगाना बेबुनियाद है।
- उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चंदे को लेकर जो लोग चोर होने की बात कह रहे हैं, वे खुद कटघरे में हैं।
- उन्होंने अनुपम खेर द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग बिना पूरी स्थिति समझे विक्टिम कार्ड खेलने वालों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिन्हें देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
चंदे की राशि और अनुमानों पर सवाल
चंदा चोरी के दावों पर बात करते हुए उन्होंने गणितीय आधार पर अनुमान लगाया कि यदि लाखों-करोड़ों लोगों ने थोड़ा-थोड़ा योगदान भी दिया हो, तो यह राशि बहुत बड़ी हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राम, जो सभी हिंदुओं के आराध्य हैं, उनके नाम पर हो रहे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता को लेकर गलत बयानबाजी करने वालों को जवाब मिलना चाहिए।


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