श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर राम मंदिर चढ़ावा और कथित गबन मामले में पहली FIR दर्ज की जा चुकी है। SIT की शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है और कुछ करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है।
लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बाद विपक्ष और आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों को ही मोहरा बनाया जा रहा है या व्यवस्था की बागडोर संभालने वाले बड़े चेहरों पर भी कानून का शिकंजा कसेगा।
SIT रिपोर्ट और FIR का पूरा घटनाक्रम
23 जून को SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी, जिसमें लगभग 20 पन्नों की रिपोर्ट में 150 लोगों से पूछताछ का विवरण शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिपोर्ट में निम्नलिखित सिफारिशें की गईं:
- ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए।
- किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंदिर का CEO नियुक्त किया जाए।
- पिछले 5 साल के चढ़ावे का ऑडिट कराया जाए।
इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में SIT ने कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जिन पर चोरी, गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं दर्ज की गई हैं।
नामजद आरोपी और बरामदगी
FIR में दर्ज किए गए 8 मुख्य आरोपियों में मंदिर के कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं, जिन पर दानपात्र और चढ़ावे में हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं:
- रमाशंकर यादव उर्फ टिंक्लू (चंपत राय का करीबी और ड्राइवर)
- अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय
- मनीष यादव, लब्कुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा
- सुभाष श्रीवास्तव (दान गणना इंचार्ज, रिटायर्ड बैंक कर्मी)
जांच के दौरान अधिकारियों ने आरोपियों की निशानदेही पर लगभग 2 करोड़ रुपये की रिकवरी की है और मुख्य आरोपी टिंक्लू के घर से सोना मिलने की खबरें भी सामने आई हैं।
विपक्ष का हमला और बड़े नामों पर सवाल
आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
आप सांसद संजय सिंह ने जमीन घोटाले और दान चोरी से जुड़े दस्तावेज सौंपते हुए आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। वहीं, अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा कि कहीं जांच का निष्कर्ष 'पहले और जांच बाद में' तो नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री का बयान और आगामी सुनवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि SIT की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है जिसमें सीबीआई जांच और सीएजी से ऑडिट की मांग की गई है, जिस पर अगली सुनवाई 29 जून को होनी तय है।


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