अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर बनने और चढ़ावा चढ़ने तक भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। 'The Janpath News' को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कारसेवक और धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट और पदाधिकारियों पर कई बड़े खुलासे किए हैं।
संतोष दुबे ने आरोप लगाया है कि राम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण से जुड़े हर चरण में कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं और चोरी की गई हैं। उनके अनुसार, निर्माण कार्यों के दौरान सामग्री की खरीद से लेकर दान और भूमि अधिग्रहण तक में नियमों की अनदेखी कर कमीशनखोरी को बढ़ावा दिया गया।
चंम्पत राय और अनिल मिश्रा पर सीधे आरोप
कारसेवक संतोष दुबे ने दावा किया कि चंपत राय बंसल और उनकी टीम 24 घंटे अयोध्या में रहती थी और उन्हीं की देखरेख में कथित तौर पर गड़बड़ियां की गईं। उन्होंने अनिल मिश्रा पर निशाना साधते हुए उन्हें "40% कमीशन वाला चोर" करार दिया और कहा कि वे बिनायक वर्मा, जेई और महिपाल सिंह लेखाकार जैसे अधिकारियों के बयानों को नकारा नहीं जा सकता।
सामग्री खरीद और दान में वित्तीय अनियमितताएं
- मंदिर निर्माण के लिए मंगवाई जाने वाली सीमेंट (100 बोरी की जगह 400 बोरी दर्ज होना) और सरिया की मात्रा में हेरफेर किया गया।
- सामग्री की खरीद और दान में एक का दाम चार गुना तक वसूले जाने के आरोप लगाए गए हैं।
- राम जन्मभूमि परिसर की मिट्टी को खुदवाकर तीन जगहों से बेचे जाने और प्रति किलो मिट्टी 10 से 20 हजार रुपये में बेचे जाने का दावा किया गया है।
- डंपर और कचरे के उठान के नाम पर भी फर्जी तरीके से पैसे वसूले गए।
दानदाताओं के साथ वादों का उल्लंघन
संतोष दुबे ने बताया कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए पत्थर देने का वादा किया था और रॉयल्टी या प्राथमिकता मांग रहे थे, उनसे दान स्वीकार नहीं किया गया। इसके बजाय, पांच गुना अधिक दाम देकर दूसरी जगहों से पत्थर खरीदे गए, ताकि कमीशन और लेनदेन का खेल सुचारू रूप से चलाया जा सके।
मामले को दबाने के प्रयास और लड़ाई जारी रखने का संकल्प
कारसेवक ने आरोप लगाया कि सच्चाई को छिपाने और दबाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि SIT (एसआईटी) और समाज के सामने इन सच्चाइयों को लाना जरूरी है ताकि असली चोरों को बेनकाब किया जा सके और अपने बाल-बच्चों के भविष्य के लिए सच्चाई को स्वीकार किया जाना चाहिए।


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