शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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राम मंदिर निर्माण में कमीशनखोरी? कारसेवक संतोष दुबे का बड़ा दावा
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राम मंदिर निर्माण में कमीशनखोरी? कारसेवक संतोष दुबे का बड़ा दावा

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर 1992 के कारसेवक संतोष दुबे ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चंदा चोरी और ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े ट्रस्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 1992 के कारसेवक और धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे ने 'द जनपथ न्यूज़' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के नाम पर बड़े पैमाने पर चंदा चोरी और भ्रष्टाचार हुआ है, और इस मामले में ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

1992 के कारसेवक का संघर्ष और वर्तमान हालात

संतोष दुबे ने 6 दिसंबर 1992 की घटनाओं को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अयोध्या आंदोलन के दौरान अपनी जान दांव पर लगाई थी।

  • बाधाओं को तोड़ते समय गुंबद खिसकने के कारण वे लगभग डेढ़ सिट्टा नीचे गिर गए थे और उनके शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं।
  • उस समय उनके शरीर की 17 हड्डियां टूटी थीं और 4 गोलियां लगी थीं, जिसके बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।
  • उनका कहना है कि वे आज भी राम मंदिर के पक्ष में हैं, लेकिन मंदिर निर्माण से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों और चंदे के दुरुपयोग का खुलकर विरोध कर रहे हैं।

चंदा चोरी और राम सिलाइयों के गायब होने के आरोप

साक्षात्कार में संतोष दुबे ने राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से आए दान और राम सिलाइयों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।

  • उन्होंने दावा किया कि 1989-1990 के दौरान अयोध्या लाई गई लगभग 12,500 राम सिलाइयों (जिनमें सोने, चांदी और हीरे-जवाहरात जड़े थे) में से अधिकांश 2002 तक गायब हो गईं।
  • उनका आरोप है कि इन सिलाइयों और दान में आए धन का कोई हिसाब नहीं है, और इस भ्रष्टाचार में कई बड़े नाम शामिल हैं।
  • उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए ताकि असली चोरों बेनकाब किया जा सके।

एसआईटी जांच और ट्रस्ट पर अविश्वास

संतोष दुबे ने एसआईटी जांच की मौजूदा स्थिति पर अविश्वास जताया है और ट्रस्ट के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

  • उनका कहना है कि एसआईटी की जांच से उन्हें पूरी संतुष्टि नहीं है, क्योंकि असली दोषियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।
  • उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में इस मामले को लाकर ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए और एक नया न्यास गठित किया जाना चाहिए जिसमें कारसेवकों के परिजनों को भी शामिल किया जाए।
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