हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव द्वारा सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने माफी मांगने के मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलती करने के बाद उसे स्वीकार करना और माफी मांगना कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि एक महान गुण है।
अखिलेश यादव की माफी पर शंकराचार्य का दृष्टिकोण
शंकराचार्य ने याद दिलाया कि अतीत में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान उन पर लाठियां बरसाई गई थीं, जिसके बाद उन्होंने और उनकी सरकार ने स्थिति का विश्लेषण कर माफी मांगी थी। उन्होंने इस बात की सराहना की कि अखिलेश यादव ने अपनी गलती को स्वीकार किया और जनता के सामने सार्वजनिक रूप से खेद जताया।
- अखिलेश यादव ने दर्जनों कैमरों के सामने स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई थी।
- गलती सुधारने की यह प्रवृत्ति देश के अन्य नेताओं को भी उनसे सीखनी चाहिए।
- माफी मांगने से किसी का यश घटता नहीं, बल्कि और अधिक बढ़ता है।
शंकरचार्य पद और चुनौतियों पर विचार
साक्षात्कार में जब शंकराचार्य पद को लेकर उठने वाले सवालों और चुनौतियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि चुनौती देने वालों का कोई लोकस (आधार) नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी पद या निर्णय पर सवाल उठाने से पहले यह देखना चाहिए कि क्या सवाल उठाने वाले के पास ऐसा करने का अधिकार है भी या नहीं।
- एक बार निर्णय हो जाने के बाद बार-बार सवाल उठाना अनुचित है।
- शंकराचार्य पद पर उनकी नियुक्ति पूरी तरह से नियमानुसार और विधिवत हुई है।
- धर्म के नाम पर अधर्म करने वाले लोग ही ऐसे बेबुनियाद प्रश्न उठाते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति और मुख्यमंत्री पर राय
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल और गाय की रक्षा के मुद्दों पर बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि राज्य में अभी तक ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं आया जिसके सामने गौ माता की रक्षा को लेकर सच्ची संवेदनशीलता दिखाई दी हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य के नेता गौ माता की रक्षा और सनातन धर्म के संवर्द्धन के प्रति अधिक गंभीर होंगे।
- गाय माता का नाम पशु सूची में आने पर भी नेताओं की तरफ से ठोस कदम नहीं उठाए गए।
- आगामी चुनावों में जनता और नेता गौ माता की रक्षा के संकल्प के साथ आगे आएं।
- सनातन धर्म और गौ सेवा के समर्थन में खड़े होने वाले लोगों का ही वास्तविक स्वागत होना चाहिए।


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