ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 'The Janpath News' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राम मंदिर और देश की राजनीति को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर को राजनीतिक और प्रतिष्ठा के उद्देश्यों के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
राम मंदिर और सनातन धर्म का मुद्दा
शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर और आस्था कोई अलग वस्तु नहीं हैं, दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जिस हिंदू धर्म का मूर्त स्वरूप भगवान श्रीराम थे, उसी सनातन धर्म को विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है और राम के नाम पर राजनीति की जा रही है।
- राम को एक व्यक्ति मानने वाले आज उस स्थान पर बैठ गए हैं जहाँ उन्हें परमब्रह्म माना जाता था।
- संस्थाओं में भगवान को भगवान नहीं बल्कि एक मनुष्य या महापुरुष ही माना जा रहा है।
- आस्था के केंद्र में ऐसे लोगों काबिज हो चुके हैं जो राम को भगवान तक नहीं मानते।
मुकदमे और न्यायपालिका पर सवाल
शंकराचार्य ने राम जन्मभूमि मुकदमे और न्यायपालिका की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ने वाले सनातन धर्मी और मूल धर्माचार्य थे, जिन्होंने अदालत में सबूत और पैरवी करके मुकदमा जीता था।
- ईसवी सन 62 में ही यह तय हो गया था कि यह मुकदमा व्यक्तियों का नहीं बल्कि समुदाय का है।
- मुकदमा जीतने वाले मूल धर्माचायों और पक्षकारों को बाद में किनारे कर दिया गया।
- सुधार और सत्ता में बैठे लोगों ने अपने विश्वस्त लोगों को लाकर ट्रस्ट बना लिया और मनमानी की।
प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि आज देश की सर्वोच्च सत्ता और राज्य सरकारें अपनी पसंद के लोगों को ट्रस्ट में बैठा रही हैं।
- अयोध्या में राम सेवक पुरम में हजारों फ्लैट और कार्यालय बने हैं, लेकिन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी से परामर्श किए अपने पसंद के लोगों को ट्रस्ट में स्थापित कर दिया।
- अयोध्या में प्रतिष्ठा के समय बड़े-बड़े साधु-संतों और विशिष्ट जनों को बाहर बैठाया गया और पुलिस ने परिसर खाली करवा लिया था।


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