शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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श्रद्धा वालकर मर्डर केस: 4 साल बाद भी अधूरा ट्रायल, परीक्षा के नाम पर टली सुनवाई
कानून व्यवस्था

श्रद्धा वालकर मर्डर केस: 4 साल बाद भी अधूरा ट्रायल, परीक्षा के नाम पर टली सुनवाई

दिल्ली के बहुचर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड मामले में चार साल बीत जाने के बाद भी आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को सजा नहीं मिली है। 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई टल गई क्योंकि आरोपी की परीक्षा का हवाला दिया गया था।

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देश के सबसे चर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड मामले में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। चार साल बीतने के बाद भी श्रद्धा वालकर के कटे हुए अंग अदालती फाइलों और मालखाने के चक्कर काट रहे हैं, जबकि आरोपी आफताब अमीन पूनावाला अभी भी कथित तौर पर अपनी चाल चल रहा है।

कोर्ट की सुनवाई में नई चाल

अदालत ने केस के स्पीडी ट्रायल के लिए 20 जुलाई से 27 जुलाई तक यानी रोजाना सुनवाई तय की थी। लेकिन आखिरी वक्त पर आरोपी आफताब पूनावाला ने नई चाल चलते हुए अदालत को बताया कि 20 जुलाई को तिहाड़ जेल में इग्नू परीक्षा केंद्र पर उसकी एमए की परीक्षा है, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई टाल दी।

पीड़ित पक्ष और वकीलों की आपत्तियां

पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाह ने कड़ा ऐतराज़ जताया और सवाल उठाया कि जब परीक्षा की तारीखें बहुत पहले से तय होती हैं, तो आरोपी ने यह बात कोर्ट को पहले क्यों नहीं बताई। उन्होंने कहा कि डिफेंस काउंसिल ने जानबूझकर तय तारीखों पर कोई आपत्ति नहीं की और ऐन वक्त पर अर्जी लगाकर सुनवाई टाल दी।

  • परीक्षा की तारीखें 8-10 दिन या एक हफ्ता पहले से पता थीं।
  • जानबूझकर कोर्ट की तय तारीख पर सबमिशन नहीं दिए गए और बाद में आवेदन दिया गया।
  • पीड़ित परिवार, रिश्तेदार और दोस्त इस बात से बेहद गुस्से में हैं कि पांच साल बाद भी न्याय नहीं मिल रहा है।

अब तक क्या हुआ: मुख्य बिंदु

श्रद्धा वालकर हत्याकांड से जुड़े कुछ अहम अपडेट इस प्रकार हैं:

  • अब तक श्रद्धा वालकर का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है, और उसके पार्थिव शरीर को अभी तक नहीं लौटाया गया है।
  • चार साल बीतने के बाद भी इस केस का ट्रायल अधूरा पड़ा है।
  • आफताब की एमए परीक्षा वाली अर्जी मंजूर होने के बाद अब वह तिहाड़ जेल में ही परीक्षा देगा।
  • साकेत कोर्ट ने 20 जुलाई की सुनवाई को टाल दिया है।

इंसाफ की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल

सवाल यही है कि जब इस तरह के गंभीर मामलों में महज 10-13 दिन में ट्रायल पूरा होना चाहिए था, तो चार साल बीत जाने के बाद भी श्रद्धा का अंतिम संस्कार क्यों नहीं हुआ। देश का कानून और न्यायपालिका कब इस मामले में पीड़िता के परिवार को वास्तविक न्याय दिलाएगी, यह आज भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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