शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर जंतर-मंतर पर छात्रों का जोरदार विरोध
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सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर जंतर-मंतर पर छात्रों का जोरदार विरोध

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने और अभिजीत दीप पर स्याही फेंके जाने के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन और तेज होगा तथा वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

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देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉरपोरेट जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच सबसे बड़ी खबर यह सामने आई है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इसके साथ ही कुछ अन्य छात्र, जो आमरण अनशन पर थे, उन्हें भी अस्पताल ले जाया गया है, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे इस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से पहुंचे छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पारदर्शी व निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर डटे हुए हैं।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर छात्रों का रोष

छात्रों ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराना और उनके साथ इस तरह का बर्ताव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

  • छात्रों का कहना है कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर थे और वे छात्रों के लिए प्रेरणा हैं।
  • प्रदर्शनकारियों ने इसे गिरफ्तारी या इलाज के नाम पर उठाया गया अनुचित कदम बताया है।
  • छात्रों का मानना है कि इस तरह के कदमों से उनका हौसला टूटने के बजाय और मजबूत होगा।

अभिजीत दीप पर स्याही फेंकने की घटना

प्रदर्शन के दौरान एक अन्य घटना में छात्र अभिजीत दीप पर स्याही फेंके जाने से माहौल और गरमा गया।

  • छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन को कमजोर करने के लिए विपक्षी विचारधारा के लोगों द्वारा ऐसी हरकतें की जा रही हैं।
  • स्याही फेंकने वाली एक महिला के बारे में छात्रों ने दावा किया कि उसे इस बात का भी ज्ञान नहीं था कि उसने ऐसा क्यों किया।
  • इस घटना के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया है और उन्होंने एकजुट होकर विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है।

प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

प्रदर्शन कर रहे छात्र और युवा संगठन देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त नियम बनाना।
  • भविष्य में परीक्षाएं पूरी तरह से फ्री, फेयर और पारदर्शी तरीके से आयोजित करना।
  • 20 तारीख को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर छात्रों में भारी उत्साह और चेतावनी का भाव है।
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