शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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सोनम वांगचुक को हटाने के बाद जंतर-मंतर पर छात्रों का फूटा गुस्सा, जानिए क्या है पूरा मामला
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सोनम वांगचुक को हटाने के बाद जंतर-मंतर पर छात्रों का फूटा गुस्सा, जानिए क्या है पूरा मामला

पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाए जाने और 20 दिन के अनशन के बाद छात्रों में गहरा आक्रोश देखा गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

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दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पिछले 20 दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने सरकार की कार्यप्रणाली और पुलिस के रवैये पर तीखे सवाल उठाए हैं। पटना, उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों से आए छात्र इस बात से नाराज हैं कि बिना किसी पूर्व सूचना या संवाद के वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।

20 दिनों के अनशन और सोनम वांगचुक को हटाने पर छात्रों का रोष

छात्रों का कहना है कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी हालत खराब होने के बावजूद उन्हें बहुत ही अनुचित तरीके से वहां से उठाया गया, जिसे छात्र तानाशाही और दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार:

  • सोनम वांगचुक से मिलने या बात करने तक का मौका नहीं दिया गया।
  • पुलिस ने उन्हें सफेद कपड़ों में जबरन अस्पताल पहुंचाया।
  • छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी किसी भी मांग को सुनने के लिए तैयार नहीं है।

पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक रवैये के खिलाफ विरोध

प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने पुलिस और प्रशासन के तौर-तरीकों की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर समय से पहुंचने वाले छात्रों को यदि नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है, तो क्या पुलिस और सरकार के लिए कानून के दायरे में काम करना जरूरी नहीं है? छात्रों की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित थीं:

  • पुलिस ने सिविल ड्रेस में आकर जिस तरह का बर्ताव किया, वह गुंडागर्दी जैसा था।
  • छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
  • सरकार और प्रशासन लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने का हक छीन रहे हैं।

छात्रों की मुख्य मांगें और बीजेपी सरकार के खिलाफ बहिष्कार की हुंकार

छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि उन मुद्दों और कारणों के लिए है जिनके लिए यह मुहिम चलाई जा रही थी। प्रदर्शनकारियों की आवाज और नाराजगी इन बिंदुओं पर केंद्रित रही:

  • शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और शिक्षण संस्थानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
  • सरकार से नाराजगी जताते हुए कुछ छात्रों ने बीजेपी के पूर्ण बहिष्कार की मांग की।
  • छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 जुलाई को और बड़ा जनसैलाब उमड़ा, तो इसके परिणाम सरकार को भुगतने होंगे।
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