शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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सोनम वांगचुक पर कार्रवाई से नाराज़ महिला प्रदर्शनकारी: 'सरकार ने शिकायत का मौका दिया है'
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सोनम वांगचुक पर कार्रवाई से नाराज़ महिला प्रदर्शनकारी: 'सरकार ने शिकायत का मौका दिया है'

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के समर्थन में लगातार प्रदर्शन जारी है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आईं एक महिला प्रदर्शनकारी ने सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने और उनके साथ हुए व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस विरोध प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से लोग अपनी बात रखने और छात्रों-युवाओं के समर्थन में पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आईं एक 55 वर्षीय महिला प्रदर्शनकारी ने सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने और उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

सोनम वांगचुक की स्थिति और अस्पताल में भर्ती

महिला प्रदर्शनकारी ने बताया कि उन्हें इस आंदोलन में शामिल हुए तीन दिन हो चुके हैं। उनका कहना है कि आज सोनम वांगचुक भाई जी को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है, जो कि बहुत गलत हुआ है।

  • दिन में तीन बार डॉक्टर आकर उनकी सेहत की जांच करते थे।
  • यदि उनकी तबीयत खराब हो रही थी, तो सरकार को डॉक्टर और पुलिस बल के साथ उन्हें अस्पताल ले जाना चाहिए था।
  • लेकिन उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया और सफेद कपड़ों में उठाकर ले जाया गया, वह बिल्कुल उचित नहीं है।

प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप

महिला ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ आए अन्य नेताओं और समर्थकों को भी बलपूर्वक रोका गया।

  • साथियों और भाइयों को पकड़ना, रोकना और घसीटना गलत है।
  • किसी का झोटा (बाल) उखाड़ लेना और इस तरह की हरकतें करना न्यायसंगत नहीं है।
  • महिला का आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर जब उनका लड़का वीडियो बना रहा था, तो उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया।

सरकार की नीतियों पर सवाल और अपील

प्रदर्शनकारी महिला का कहना है कि सरकार ने देश भर के युवाओं और नागरिकों को जंतर-मंतर पर आकर अपनी बात रखने का मौका तो दिया है, लेकिन प्रशासन का रवैया सही नहीं रहा।

  • सरकार को देश के हर प्रांत से आने वाले युवाओं और नागरिकों की बात सुननी चाहिए।
  • किसी को भी जबरन चुप कराने या फांसी देने जैसी बातें नहीं होनी चाहिए।
  • यह गरीबों और पढ़ाई करने वाले बच्चों की जिंदगी का सवाल है, जिसे सरकार को गंभीरता से समझना चाहिए।
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