बिहार में नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मजिस्ट्रेट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर केंद्रीय कारागार भेज दिया है। राजनीतिक जीवन में यह पहला मौका है जब तेज प्रताप यादव को जेल जाना पड़ा है।
पुलिस ने शनिवार देर रात पटना के सिटी सेंटर मॉल के पास से तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उनकी रात जेल में ही गुजरी। इस कार्रवाई के बाद उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव से लेकर बिहार के विपक्षी नेताओं में भारी रोष देखा जा रहा है और वे सरकार पर हमलावर हैं।
गिरफ्तारी और जेल भेजने की प्रक्रिया
पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद तेज प्रताप यादव पुलिस की गाड़ी में बैठे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें निम्नलिखित जगहों पर ले जाया गया:
- सबसे पहले दीघा थाना ले जाया गया।
- इसके बाद नौबतपुर थाना ले जाया गया।
- रात करीब सवा बारह बजे उन्हें छज्जूबाग स्थित न्यायिक दंडाधिकारी के आवास पर पेश किया गया।
- न्यायिक हिरासत के आदेश के बाद उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया।
तेज प्रताप यादव पर लगे गंभीर आरोप
पुलिस के अनुसार, तेज प्रताप यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनके तहत यह कार्रवाई की गई है:
- कानून व्यवस्था भंग करने का आरोप।
- समर्थकों को उकसाने का आरोप।
- सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप।
- हिंसक प्रदर्शन को बढ़ावा देने का आरोप।
विपक्षी दलों की कड़ी प्रतिक्रिया
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर महागठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों और आंदोलनकारियों को जल्द रिहा नहीं किया गया और केस वापस नहीं लिया गया, तो कल बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कांग्रेस और आरजेडी के नेताओं ने भी सरकार के इस कदम की निंदा की है और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
सत्तारूढ़ दलों का पक्ष
दूसरी ओर, एनडीए और सरकार के मंत्रियों ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है। मंत्रियों का कहना है कि जो भी कानून व्यवस्था तोड़ेगा, चाहे वह कोई भी हो, सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। प्रतिबंधित इलाके में हंगामा करने और कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


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