शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
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तृणमूल कांग्रेस पर कब्ज़े की जंग: चुनाव आयोग पहुंचे ममता और ऋतब्रत गुट
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तृणमूल कांग्रेस पर कब्ज़े की जंग: चुनाव आयोग पहुंचे ममता और ऋतब्रत गुट

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह और पार्टी पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट आमने-सामने आ गए हैं। दोनों गुटों ने चुनाव आयोग के पास अपने-अपने बहुमत के दस्तावेज सौंप दिए हैं, जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है। पार्टी के 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह और असली टीएमसी होने का दावा ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों गुटों द्वारा किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को संगठन और विधायकों के समर्थन से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए सोमवार शाम तक का समय दिया था, जिसके बाद मामला निर्णायक दौर में पहुंच गया है।

चुनाव आयोग के सामने यह सबसे बड़ा सवाल है कि असली तृणमूल कांग्रेस किसके पास है और 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह पर किसका अधिकार होगा। इस विवाद ने न सिर्फ पार्टी के भविष्य बल्कि पश्चिम बंगाल की पूरी राजनीतिक दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोनों गुटों के चुनाव आयोग में दावे

ममता बनर्जी गुट की तरफ से कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष चुनाव आयोग पहुंचे और पार्टी पर अपना दावा मजबूत किया। वहीं दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी अपने बहुमत का दावा आयोग के सामने रखा है।

  • ऋतब्रत गुट का दावा है कि उनके पास विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी 58 विधायकों का समर्थन है।
  • ममता गुट ने बागी नेताओं को 'फ्रॉड' करार देते हुए कहा है कि यदि वे खुद को असली टीएमसी मानते हैं, तो पहले विधायक पद से इस्तीफा दें और जनता के बीच जाकर अपना जनादेश साबित करें।
  • ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी में कर्मचारियों और नेताओं का अपमान किया जा रहा है और चुनाव हारने के बाद पार्टी की स्थिति खराब हो चुकी है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा और राजनीतिक हलचल

प्रदेश अध्यक्ष पद से चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे और उसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के साथ उनकी बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल को और तेज कर दिया है।

  • ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि अब कोई भी इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जैसी व्यवस्था में नहीं रहना चाहता।
  • दूसरी तरफ, बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने इसे कानूनी मामला बताते हुए कहा है कि इसका फैसला चुनाव आयोग को करना है और टीएमसी को विधानसभा में आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

चुनाव आयोग की कसौटियां और आगे की दिशा

इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग आमतौर पर दो बड़ी कसौटियों पर फैसला करता है:

  • संगठन में किसके पास बहुमत है।
  • विधायकों और सांसदों का समर्थन किसे हासिल है।

यदि किसी एक गुट के पक्ष में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो चुनाव आयोग चुनाव चिन्ह 'फ्रीज' करने का विकल्प भी अपना सकता है, जिससे दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि 'जोड़ा फूल' और बंगाल में असली टीएमसी की पहचान किसके पास रहेगी।

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